सीईओ का तबादला
Noida उत्तर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति से काम करने वाले Noida प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम को आज प्रदेश सरकार ने हटा दिया है।
फिलहाल अभी उन्हें प्रतीक्षारत रखा गया है।बता दे कि सीईओ ने Noida प्राधिकरण के भीतर फैले भ्रष्टाचार व अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की थी।जिसके बाद लोग इनकी कार्यशैली से बहुत प्रभावित हुए थे।वही भ्रष्टाचार मिलने पर अपने ही अधिकारियों के खिलाफ कारवाई करके चर्चा में आए थे।बताते चले कि एक तरफ केंद्र व राज्य सरकार आम लोगों को’जीरो टॉलरेंस’ सरकार होने का दावा करती है वहीं नोएडा जैसे हाईटेक शहर को नयी उच्चाईयों पर पहुँचाने आईएएस अफसर लोकेश एम को उनके पद से हटाना उनकी दोहरी सोच को दर्शाता।सूत्रों की माने तो सीईओ का ईमानदारी से काम करना कुछ अवैध कार्य करने वाले लोगों को रास नहीं आया और सबने एकजुट होकर इनको हटाने का प्रयास किया।
इसकी नींव उस दिन रखी गयी जब सीईओ ने बड़े बड़े बिल्डरों के अवैध निर्माण को ध्वस्त किया और लोगों से वादा किया किसी को नहीं छोड़ेंगे।कुछ दिन पूर्व हीजेपी ग्रुप और सुपरटेक के साथ15 अन्य बिल्डरों के खिलाफNoida अथॉरिटी ने खिलाफ रिपोर्ट भेजी थी।जिसकी वजह से EOW की निगाहें नोएडा के 15 बिल्डरों पर टिक गई थी।उनकी एक खास आदत थी कि वो अपने कार्य में किसी की दखलंदाजी उन्हें बर्दाश्त नहीं थी।ना कार्रवाई के दौरान किसी का फोन तक नहीं उठाते थे।वही प्राधिकरण में भ्रष्टाचार मिलने पर एक से पांच लाख रुपये तक के कामों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।इसके अलावा पांच लाख से दो करोड़ रुपये तक के कामों के लिए अथॉरिटी के सीईओ की अनुमति लेना जरुरी कर दिया था।
वही Noida के लोगों के लिए कई अच्छे काम किए।आम नागरिकों को दलालों से मुक्ति दिलाने का बीड़ा उठाया।अब शासन ने उनका तबादला कर दिया। दरअसल इसका अंदेशा कई दिनों से लगाया जा रहा था, चर्चाएं जोरों पर थीं कि सीईओ जिस ढंग से ईमानदारी से काम कर रहे हैं बहुत दिनों तक वह Noida में इस पद पर कायम नहीं रह पाएंगे। यह कयासबाजी आज सोमवार को फलीभूत भी हो गयी।
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