युवराज मेहता की मौत के मामले में पर्यावरण नियमों के पालन में गंभीर चूक
Noida।युवराज मेहता की मौत के मामले में पर्यावरण नियमों के पालन में गंभीर चूक और कानून के उल्लंघन के आरोप में आजनेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आज नाराजगी जताते हुए प्रदेश सरकार को नोटिस भेजा है और उन्हें निर्देश दिया है कि वे कम से कम एक सप्ताह के भीतर हलफनामे के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करें।

आरोप है किहादसे वाली जमीन मूल रुप से एक निजी मॉल प्रोजेक्ट के लिए आवंटित की गई थी।जिसमेंपर्यावरण नियमों का पालन नहीं किया गया।बताते चले कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के छ दिन बाद एनजीटी ने इस मामले में नोएडा अथॉरिटी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB), उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव (पर्यावरण) और गौतम बुद्ध नगर के जिला मजिस्ट्रेट (DM) को प्रतिवादी बनाया है।इन सभी संबंधित अधिरकारियों को नोटिस दे दिया गया है और सबसे सप्ताह भर के भीतर जवाब मांगा गया है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह घटना पर्यावरण नियमों के पालन में गंभीर चूक और कानून के उल्लंघन की ओर इशारा करती है।एनजीटी ने अपनी रिपोर्ट में दर्ज किया है कि संबंधित जमीन मूल रुप से एक निजी मॉल प्रोजेक्ट के लिए आवंटित की गई थी।लेकिन लगभग एक दशक तक ध्यान न दिए जाने के कारण, बारिश के पानी और आस-पास की हाउसिंग सोसायटियों से निकलने वाले गंदे पानी के जमा होने से यह जगह अब एक तालाब में तब्दील हो गई थी।ट्रिब्यूनल के आदेश में स्थानीय निवासियों के उन आरोपों को भी दर्ज किया गया है, जिनमें उन्होंने नोएडा अथॉरिटी की निष्क्रियता की बात कही थी।
निवासियों का कहना है कि जलजमाव की समस्या लंबे समय से बनी हुई थी, जिससे हिंडन नदी का जलस्तर बढ़ने पर पानी के वापस लौटने और खतरा पैदा होने की आशंका बनी रहती थी।
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