Noida Authority
Noida Authority के सीईओ लोकेश एम ने निर्देश पर अवैध निर्माण करने वाले और भूमाफियाओं के खिलाफ निरंतर कारवाई हो रही है।जिससे लोगों में नोएडा प्राधिकरण के सीईओ की एक अलग ही छवि बनती जा रही है।
और तो और भ्रष्टाचार या जनता की शिकायतों की अनदेखी पर अधिकारियों पर कारवाई से लोग उनकी कार्यशैली के कायल हो गए है।लेकिन कुछ लोगों को उनका यह व्यवहार पसंद नहीं आ रहा है।ऐसे ही कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए उनके अधिकारियों पर मिथ्या आरोप लगा रहे है।ऐसा ही एक मामला Noida Authority में तैनात स्वछ छवि के एक वरिष्ठ अधिकारी का है। जिनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है।बता दे कि कुछ दिनों से मुख्यमंत्री को दिए एक पत्र की चर्चा हो रही है।पत्र में शिकायत कर्ता ने एक विधायक को दी अपनी शिकायत में नोएडा प्राधिकरण में तैनात एक अधिकारी के ऊपर भ्रष्टाचार, अवैध उगाही और गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं का आरोप लगा है।आपको बता दे कि एडवोकेट उत्कर्ष राघव नामक एक व्यक्ति ने खतौली विधायक मदन भैया को एक शिकायत पत्र दिया।
विधायक को दिए पत्र में शिकायत कर्ता ने Noida Authority के वरिष्ठ प्रबंधक पर तैनात गौरव बंसल पर भ्रष्टाचार और अवैध उगाही के आरोप लगाये।इस शिकायत के आधार पर खतौली विधायक मदन भैया ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए, जांच अवधि के दौरान संबंधित अधिकारी का तबादला किसी अन्य प्राधिकरण में किया जाए ताकि जांच प्रभावित न हो।इस पूरे में यह समझना जरुरी है कि शिकायत कर्ता कौन है व कहा का रहने वाला है और उसका अधिकारी से क्या लेना देना है।सूत्रों की माने तो शिकायत कर्ता एक वकील है और वह किसी अन्य जिले का रहने वाला है।वह कभी अधिकारी से मिला भी नही।तो पहला सवाल उठता है कि फिर शिकायत कर्ता ने वरिष्ठ प्रबंधक के खिलाफ शिकायत क्यों दी।
दूसरा सवाल ये कि अगर किसी के साथ गलत हुआ भी है तो शिकायत कर्ता वकील साहब ही क्यों बने।तीसरा सवाल क्या वकील साहब अपने निजी स्वार्थ के लिए ये शिकायत जिले के बाहर के विधायक को दी क्योंकि अगर वरिष्ठ प्रबंधक ने कुछ गलत भी किया था तो उसकी शिकायतसबसे पहले Noida Authority के सीईओ उसके बाद नोएडा विधायक पंकज सिंह,दादरी विधायक तेजपाल नागर, जेवर विधायक धीरेन्द्र सिंह या फिर सांसद महेश शर्मा को देनी चाहिए थी।इसको देख कर ऐसा लगता है कि शिकायत कर्ता को जिले के जनप्रतिनिधियों पर जरा भी विश्वास नहीं या फिर यू कहे कि अब उन्हें सिर्फ खतौली विधायक पर ही विश्वास है।देखा जाये तो जिले के जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र की जानकारी अधिक होती फिर भी शिकायत कर्ता नेजिले से बाहर के विधायक पर विश्वास जता कर लोगों के मन में संदेह का बीज बो दिया है।
इस प्रकरण में एक कहावत बहुत सटीक बैठती है ” दाल में कुछ तो काला है “लेकिन ऐसा लगता है कि पूरी दाल ही काली है।ऐसा लगता है कि एक प्रतिष्ठित अधिकारी के बढ़ते कदम को रोकने और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है।
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