Noida:सर्दी में जहरीली हवा से आंखों की जलन की समस्या बढ़ी

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हवा जहरीली होने से लोगों को आंखों में जलन

Noida।बढ़ती सर्दी के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और Noida की हवा जहरीली होने से लोगों को आंखों में जलन के साथ धुंधलापन की समस्या होने लगी है।

इस कारण आंखों से जुड़े रोगों में अचानक वृद्धि देखी जा रही है।फेलिक्स अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपांजलि आर्य ने बताया कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 350 से 450 के बीच दर्ज किया जा रहा है, जो ‘बहुत खराब से गंभीर’ श्रेणी में माना जाता है। प्रदूषण कणों में मौजूद नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, पीएम-2.5 और पीएम-10 जैसे तत्व आंखों की सतह पर सूजन और जलन पैदा करते हैं।सर्दी में प्रदूषण बढ़ने के कई कारण होते हैं। तापमान में गिरावट और धुंध के कारण ठंडी हवा नीचे बैठ जाती है, जिससे प्रदूषण ऊपर नहीं उठ पाता और जमीन के नजदीक ही जमा होता जाता है। वाहनों का उत्सर्जन होता है।

भारी वाहनों का दबाव प्रदूषण में प्रमुख योगदान करता है। निर्माण कार्य से उठने वाली धूल के कण बड़ी परियोजनाओं के चलते निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल हवा में लंबे समय तक बनी रहती है। कचरा जलाना और ग्रामीण क्षेत्रों में पराली का आंशिक प्रभाव भी धुंध और स्मॉग की परत को घना करता है। औद्योगिक धुआं यानी औद्योगिक इकाइयों का धुंआ भी हवा को भारी बनाता है।यही कारण है कि आंखों से संबंधित समस्याओं वाले मरीजों की संख्या 30–40 प्रतिशत तक बढ़ी है। बच्चों और बुजुर्गों में आंखों में जलन आदि लक्षण तेजी से उभरते हैं, क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है। अगर समय पर देखभाल न की जाए तो प्रदूषण से आंखों की एलर्जी, कॉर्निया की सूजन और कंजंक्टिवाइटिस जैसे गंभीर रोग हो सकते हैं।जरुरी है कि डॉक्टर की सलाह पर दवा का इस्तेमाल करें।

इससे सूखापन और जलन में राहत मिलती है। ठंडे पानी से छींटे मारे। इससे दिन में कई बार आंख धोना प्रभावी उपाय है। एंटी-एलर्जिक आई ड्रॉप्स डॉक्टर की सलाह पर ही लें। अगर लालिमा, दर्द या पानी अधिक आए तो तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।हर साल प्रदूषणजनित बीमारियों से लगभग 16 हजार से अधिक समयपूर्व मौतें होती हैं। जिनमें फेफड़ों की समस्याएं प्रमुख भूमिका निभाती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुल मृत्यु का लगभग 8 प्रतिशत अकेले वायु प्रदूषण से होती हैं। यही संकेत है कि आने वाले हफ्तों में प्रदूषण का स्तर और खराब हो सकता है। ऐसे में सतर्क रहना और आंखों की नियमित देखभाल करना बेहद जरूरी है।डॉ. दीपांजलि के अनुसार प्रदूषण को रोकने में व्यक्तिगत स्तर पर छोटे-छोटे कदम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सर्दी की इस जहरीली हवा में आंखों की जलन भले छोटी समस्या लगे, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भविष्य में बड़े नेत्र रोगों का कारण बन सकता है। सुरक्षित रहें, आंखों की रक्षा करें और पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में अपना योगदान दें।

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